अफगानिस्तान कुवैत, यमन, यूक्रेन, जब जरूरत पड़ी अपने नागरिकों के साथ खड़ी रही मोदी सरकार

कुवैत हो या अफगानिस्तान,यूक्रेन या फिर अब यमन हर जगह भारतीय नागरिकों के प्रति भारत सरकार कितना संवेदनशील रहती है ये इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विपदा में जब जब कोई भारतीय फंसता है तो उसके लिए तुरंत सरकार संकटमोटक की भूमिका निभाती है। इसी क्रम में भारत ने यमन के हूती विद्रोहियों ने सात भारतीय नाविकों सहित कैद में रखे गए 14 लोगों को रविवार को रिहा कर दिया है।

यमन में फंसे भारतीयों की हुई वतन वापसी

भारत की कूटनीति का ही कमाल है कि एक बार फिर से भारतीय लोग मौत के मुंह से बाहर निकल चुके है और तभी तो यमन से छुड़ाए गए भारतीय नाविकों ने देश में सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया है। यमन की जिस जगह से इन भारतीय नागरिकों को छुड़ाया गया वो जगह हाउती विद्रोहियों के कब्जे में है। यमन के हाउती विद्रोहियों ने लाल सागर में 2 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात के एक व्यापारी जहाज पर कब्जा कर लिया था। इसी दौरान 7 भारतीयों और विदेशियों को बंदी बनाया गया था जिन्हे रिहाकर के भारत लाया गया है। विद्रोहियों की कैद से बाहर आए मोहम्मद मुनव्वर समीर शेख ने इस मामले पर कहा है कि हम लोग वहां पर पिछले तीन साढ़े तीन महीनों से फंसे हुए थे। भारत सरकार, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय दूतावास ने हमें छुड़वा लिया। इसके लिए हम दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।

भारतीय जानकर विद्रोहियों ने किया अच्छा बर्ताव

लखनऊ के दूसरे नाविक मोम्मद जशीम खान ने बताया कि यमन में हालत बद से बदतर हो गए थे, विद्रोही हमारे जहाज और कार्गो को कैप्चर करना चाहते थे। जब उन्हें पता चला कि हम भारतीय हैं तो उन लोगों ने हमारे साथ अच्छा बर्ताव किया। एक और छुड़ाए गए नाविक ने कहा कि हम सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी की वजह से देश वापस आ सके हैं। वहीं भारत सरकार ने भी यमन सरकार का शुक्रिया अदा किया। भारत सरकार ने कहा कि भारतीय नाविकों को लेकर जिन सभी पार्टियों ने फिक्र दिखाई उन सभी का शुक्रिया, विशेषरूप से यमन सरकार का।

रिहा हुए भारतीयों की बात सुनकर ये तो साफ होता है कि बीते 8 साल की भारतीय कूटनीति का ही अशर है कि आज दुनिया में भारत की एक अलग पहचान मिली है और इस भारतीयों का रिहा होना इस बात पर मोहर लगाती है।