लहर अभी भी बरकरार- 300 साल पुरानी परंपरा के मुताबिक हुई भविष्यवाणी, ‘फिर से पीएम बनेंगे मोदी’

300 साल पुरानी परंपरा के मुताबिक हुई भविष्यवाणी, 'फिर से पीएम बनेंगे मोदी'

“आएंगे तो मोदी ही” जी हाँ बीते कुछ दिनों पहले एक भविष्यवाणी की गयी है। भविष्यवाणी में कहा गया है कि फिर से मोदी सरकार ही आने वाले ही है यानी नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालेंगे | साथ ही अगर हम कुछ वेबसाइटों की माने तो बीते पांच चरणों में भाजपा आगे निकलते दिखाई दे रही है और साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि पिछली बार से ज्यादा इस बार भाजपा को सीटें मिलेंगी|

कैसे होती है भविष्यवाणी

हम सभी जानते हैं लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के नतीजे 23 मई को आएंगे। लेकिन उसके पहले कई ज्योतिषी और सेफोलॉजिस्ट अपने अनुमानों के आधार पर अगले प्रधानमंत्री की घोषणा कर रहे हैं। कुछ ऐसी ही घोषणा महाराष्ट्र के बुलठाणा भेंडवलाल इलाके की 300 साल पुरानी परंपरा के आधार पर की गई हैं | परंपरा के अनुसार पानी से भरे एक मटके को जमीन के अंदर दबा दिया जाता हैं। इस मटके पर एक पान और उस पर एक रुपए का सिक्का और फिर उस पर एक सुपारी रखी जाती है। अगर सुपारी इधर-उधर होती हो तो देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर दूसरा शख्स बैठेगा। लेकिन अगर सुपारी अपनी जगह पर बनी हुई है, तो वही शख्स फिर से प्रधानमंत्री होगा जो वर्तमान में हैं।

आएंगे तो मोदी

बताया जा रहा है कि इस बार सुपारी अपनी जगह पर बनी रही। ऐसे में मोदी के एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने की घोषणा की गई हैं। साथ ही कुछ लोगों ने ये भी कहा की इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा एक मजबूत सरकार है और हमें फिर से मोदी सरकार ही चाहिए|

क्या है ये परम्परा

बुलढाणा के भेंडवलाल में इस परंपरा के आधार पर इलाके मे होने वाली बारिश और फसल का भी अनुमान लगाया जाता हैं। यहां पर मटके के आस-पास दाल,चावल, गेंहू,आलू के पापड जैसी चीजों को एक से 2 फुट के दायरे मे फैला दिया जाता है। अगर दाने अपनी जगह पर बने रहे तो बारिश अच्छी और फसल भी अच्छी होगी। अगर दाने इधर-उधर हुए तो दोनों खराब और अगर किसी दाने में अकूंर फूटा तो फसल और बारिश दोनो ठीक-ठाक होगी।

इस भविष्यवाणी को इलाके के सारंग धरबाघ महाराज के परिवार के लोग करते हैं। ये भविष्यवाणी हर साल की जाती है। पिछले साल की गई भविष्यवाणी के अनुसार फसल और बारिश, अर्थव्यवस्था और आतंकवादी हमलो के लेकर बात कही गई थी जो 60-75 प्रतिशत तक सही पाई गई।