चाइना बीग बुक  के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था की टूट चुकी है कमर   

चीन जो पूरे विश्व में ये कहता हुआ नही थकता था कि उसकी आर्थिक हालात सबसे बेहतर है और कोरोना से भी उसको कोई ज्यादा फर्क नही पड़ा है। लेकिन हकीकत आज ये है कि चीन के रिटेल सेक्टर कोरोना महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुए है इस सेक्टर की कमाई और बिक्री पूरी तरह से औंधे मुंह गिर चुकी है। और तो और चीन के ज्यादातर फैक्टरियों में आज ताले लटक रहे हैं। ऊपर से जब से भारत ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है उसकी हालत और ज्यादा खराब हो गई है।

आर्थिक मंदी की हुई चीन में दस्तक

यूं तो चीन समूचे विश्व में झूठ फैला रहा है कि कोरोना काल के बाद सबसे पहले उसकी आर्थिक हालात पटरी पर लौट आये हैं और उसकी GDP तेजी के साथ आगे बढ़ रही है. लेकिन चीनी अर्थव्यवस्था पर पैनी नजर रखने वाली संस्था चाइना बीग बुक  ने हाल ही में अपनी जांच और छानबीन के आधार पर दावा किया है कि चीन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। चीन कोरोना वायरस और लॉकडाउन के नुकसान से अभी तक उभर नहीं पाया है। चीन में रिटेल सेक्टर  बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में तो 2008 में आए आर्थिक मंदी से भी बुरी स्थिति पैदा हो गई है, चीन की जीडीपी इस वित्तीय वर्ष के पहले तिमाही में  6.8 फीसदी गिर चुकी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन 2008 में आए आर्थिक मंदी  से भी ज्यादा बुरी हालत में है और इसी वजह से चीन से आज कई बड़ी कंपनियां रुख मोड रही है। और देश छोड़ छोड़कर दूसरे देश की तरफ जा रही है। जिससे चीन की हालत और खराब हो रही है।

भारत से भी लग रहा झटका

दूसरी तरफ चीन भारत सीमा विवाद के चलते चीन को आर्थिक सेक्टर को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। आलम ये है कि चीनी सामान के बहिष्कार की बात करने के बाद ही चीन को 1.29 हजार करोड़ का झटका लग चुका है। इसके साथ साथ भारत सरकार ने चीन के कई बड़े ठेको को या तो खत्म कर दिया है या फिर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जिससे चीनी कंपनियो की हालात खराब हो रही है। चीन के लिए ये भी एक बुरी खबर है, अब भारत सरकार ने चीन को झटका देते हुए तय किया है कि  सरकार ने सभी सरकारी खरीद के लिए मौजूदा ई- कॉमर्स पोर्टल GeM ( Government e Marketplace) पर बिकने वाले प्रोडक्ट के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ बताना अनिवार्य कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस फैसले से चीनी कंपनियों को बहुत ज्यादा नुकसान होने वाला है. मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपनी सभी सप्लायर्स के लिए उत्पादों के तैयार होने वाले देश यानि ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ बताना अनिवार्य कर दिया है. साथ ही चीन का नाम लिए बगैर सरकार ने निर्देश दिया है कि किसी भी सरकारी खरीद में देशी प्रोडक्ट को ही तरजीह दी जाए। मतलब ये है कि चीन को आर्थिक तौर पर कमर तोड़ने में भारत भी कोई कोताही नही बरत रहा है। ऐसे में आने वाले दिनो में चीन की हालत और खराब होगी।

यानी ड्रैगन कितना भी झूठ बोल ले कि कोरोना से उसकी आर्थिक हालात में कोई फर्क नही पड़ा है और भारत के बहिष्कार से भी चीन को कोई नुकसान नही होगा। लेकिन हकीकत ये है कि चीन इस वक्त आर्थिक तौर पर बुरी तरह कमजोर हो गया है। जो बात देर सबेर चीन को मानना ही पड़ेगा।