आधार को कोर्ट की सहमती : कैसे है मोदी सरकार की बड़ी जीत

आखिरकार 4 महीने की लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से आधार कार्ड को संवैधानिक वैधता मिल ही गई। तीन जजों की संविधान पीठ ने जरूर इसमे कुछ बदलाव भी किये है। इस बीच कोर्ट ये भी माना कि आधार आज के दौर मे गरीबों की ताकत बनकर उभरा है। लेकिन आधार को अगर किसी ने मजबूती प्रदान की थी तो मोदी सरकार ही है।

मोदी सरकार ने आधार को दी नई पहचान

साल 2014 से पहले अगर आधार कार्ड की बात की जाये तो ये सिर्फ एक पहचान पत्र के अलावा कुछ नही था। और इसका इस्तेमाल भी कुछ खास नही होता था यानी यूपीए सरकार के दौर मे आधार की शुरूआत तो जरूर हुई लेकिन इसे शक्तिशाली जरूर मोदी सरकार ने ही बनायाIमोदी सरकार ने ही आधार को मजबूत करने के लिये आधार अधिनियम का गठन किया तो सरकार की 260 योजनाओं से भी जोड़ा जिससे करीब देश को चपत लगाने वाले दलालों का काम तो तमाम हुआ ही साथ ही साथ 90 हजार करोड रूपये भी बचाये। इतना ही नही जहां मनमोहन सरकार के शासन मे 63.22 करोड लोगों ने ही आधार कार्ड से मई 2014 तक  जुडे थे तो मोदी सरकार मे साल 15सितंबर 2018 तक 122 करोड लोग इससे जुड जुके है।तभी तो कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि आधार से गरीबों को नई पहचान मिली है।

आधार से लाभ

दूसरी तरफ मनमोहन सरकार मे आधार कार्ड तो लोगों ने बनवाये लेकिन उन्हे उस तरह के फायदे नही मिल पाये तभी तो जहां मोदी सरकार के पहले 6.7 करोड लोगो ने ही खाते के साथ आधार को जुड़ा तो मोदी सरकार मे इनकी सख्या 61 करोड़ से ज्यादा हो गई। मसलन मोदी सरकार के आने के बाद बैंक खातो को आधार से जोड़ा गया जिससे सरकारी योजनाओं की रकम को उन्ही के खाते मे डाला गया जिसको इससे फायदा मिलना था यानी की काला बजारी मे रोक लगी,जिसके चलते भारत सरकार के कई विभागो को करोड़ो की बचत हुई

 सबसे पहले बात गैस सब्सीडी की करते है। आधार से जुडने के बाद इस विभाग को 42 करोड रूपये से ज्यादा की बचत हुई तो फूड एंड राशन विभाग को करीब 30 करोड रूपये की बचत हुई इसी तरह RuralDep.को करीब 20 करोड के करीब का मुनाफा हुआ, समाजिक न्याय विभाग जो देश वासियों को छात्रवृत्ति देता है उसको 238 करोड रूपये का फायदा हुआ. यानि की सरकार की इस पहल से जहां विभागों को फायदा हुआ वही जनता को भी इसका सीधा लाभ मिला। 

मतलब साफ है आधार की शक्ति को जिस तरह से मोदी सरकार ने जाना और परखा उसी का नतीजा है कि कोर्ट ने भी उशकी संवैधानिकता पर सवाल खड़े नही किये और आने वाले दिनों मे आधार पर जिस रह से काम हो रहा है उससे साफ होता है कि आधार गरीबों की सबसे बड़ी शक्ति साबित होगा।