आपदा के इस दौर में फिर रची गई मोदी के खिलाफ टूलकिट वाली साजिश

अमूमन सरकार के विरोध में जब कुछ लोग खड़े होते है तो वो प्रदर्शन करते है और उसमे उनके समर्थक शामिल होते है ये सालों से सरकार के विरोध का तरीका हम देखते आये है लेकिन अब जमाना सोशल मीडिया का है और सरकार या फिर देश को समूचे विश्व में बदनाम करके उसकी छवि खराब करना हो तो इस प्लेटफार्म से बढ़िया कोई जगह नही है। बकायदा इसके लिये साजिश रची जाती है और इसके लिये टूलकिट नामक हथियार का प्रयोग किया जाता है। जी हां, वही टूलकिट जिसके जरिये किसान आंदोलन को भड़काकर राजधानी दिल्ली में कितना हंगामा हुआ था। हालांकि वो टूलकिट विदेश में तैयार किया गया था लेकिन आज फिर से आपदा के वक्त एक टूलकिट सुर्खियों में छा गई है जिसमें मोदी सरकार के साथ साथ देश को बदनाम करने की साजिश रची गई थी।

संकट के इस दौर में कुछ लोग सियासत चमकाने चमकाने की साजिश में लगे

वैसे देखा जाये तो पिछले 6 सालो में मोदी सरकार के काम काज पर उन्हे नहीं घेर पाये है ऐसे में अब आपदा के वक्त कुछ लोग मोदी सरकार को देश में बदनाम करने में कुछ ऐसा कर रहे है जिसका खमियाजा आज देश को उठाना पड़ रहा है। या यूं कहे कि कुछ लोग देश में आग लगाकर सियासत की रोटी सेक कर सत्ता का सुख पाना चाहते है और उनके खास इससब में उनका समर्थन करने के लिये काम भी कर रहे है। इस बात का खुलासा तब हुआ है जब एक टूलकिट सामने आई है जिसमें आपदा के वक्त कैसे मोदी सरकार को बदनाम करने की पूरी की पूरी थ्योरी लिखी गई है। ये भी बताया गया है कि कैसे कुंभ के जरिये भारतीय संस्कृति पर हमला करके उसे नीचा दिखाकर एक खासवर्ग से वोट हासिल करने है जबकि ईद जैसे पर्व को बेहतर बताकर एक वर्ग को खुश करना है। कैसे पहले अस्पताल के बेड को रिजर्व करना है और फिर हाहाकार मचने पर कुछ लोगों को मोहइया करवाकर  सरकार को कोसना है। यहां तक लाशो पर सियासत कैसे करनी है ये सब भी इस टूलकिट से साफ हो गया है।

विरोधियों ने माना पीएम हर संकट से अच्‍छे से निपटे

पर ये मान भी रहे है कि पीएम मोदी ने देस पर आये सभी संकट से अच्छी तरह निपटा है। इन लोगो ने ये भी माना कि देश में पीएम मोदी की छवि बहुत मजबूत है और इसे कमजोर करना आसान नहीं है ऐसे में कोरोना वायरस की ये जो दूसरी लहर आई है, उससे कैसे फायदा उठाया जाए। कैसे विदेशी पत्रिकाओं में पीएम मोदी की छवि को धूमिल कीजिए। इसलिए वे शवों और दाह संस्‍कारों की फोटो को बढ़ाकर दिखा रहे हैं। इसके साथ साथ इंडियन स्‍ट्रेन’ और ‘मोदी स्‍ट्रेन’ जैसे शब्‍दों के इस्‍तेमाल करके कही न कही देश को दुनिया में बदनाम करने की कोशिश भी की गई हालांकि डब्‍ल्‍यूएचओ ने भी इसे ‘इंडियन स्‍ट्रेन’ या ‘मोदी स्‍ट्रेन’ नाम से पुकारने से मना कर दिया है फिर भी कुछ लोग इस नाम को उछालकर देश को बदनाम करने में लगे है। जो शर्म के काबिल है।

आजादी के बाद देश ने कई तरह का विरोध देखा है लेकिन विरोध के बाद भी विश्व में सबमिलकर भारत की छवि चमकाते हुए ही दिखाई दिए लेकिन सत्ता की जिजीविषा आज इस कदर बढ़ गई है और एक नाम से कुछ लोगो को इतनी चिढ़ हो गई है कि वो महाभारत काल के धृतराष्ट्र की तरह काम करने लगे है जिसकी जितनी भी निंदा की जाये वो कम है।