टीकाकरण पर खर्च किए 9725 करोड़, अगस्त से दिसंबर तक 135 करोड़ डोज लगाने का रखा लक्ष्य

कहते है जिसका इमान साफ होता है वो कभी भी हिसाब देने में पीछे नही रहता। कुछ यही हाल मोदी सरकार का है जो लगातार पिछले सात सालों से पाई पाई का हिसाब दे रही है। इसी क्रम में अब मोदी  सरकार ने टीकाकरण में कितना पैसा लगा है इसकी जानकारी लोकसभा में दी।

टीकाकरण में अबतक 9725 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए

केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ टीकाकरण पर अब तक कुल 9725 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इसकी जानकारी लोकसभा में स्वास्थ्य़ राज्यमंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने दी। उन्होंने बताया कि देश में चल रहे कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम पर अब तक कुल 9725.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें टीकों की खरीद और टीकाकरण के लिए परिचालन लागत शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि देश में टीकाकरण तेजी से चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि अगस्त 2021 से दिसंबर 2021 के बीच कोरोना वैक्सीन की कुल 135 करोड़ डोज उपलब्ध होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य़ राज्यमंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में बताया कि घरेलू वैक्सीन विनिर्माताओं के साथ खरीद करार करने में कोई देरी नहीं हुई है। निर्माताओं को उनके साथ दिए गए आपूर्ति आदेशों के लिए अग्रिम भुगतान भी किया गया है। वही खुद स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में बोलते हुए बताया कि भारत सरकार का एक विशेषज्ञ समूह अभी भी फाइजर के साथ कोरोना वैक्सीन आपूर्ति पर बातचीत कर रहा है और जल्द ही कुछ ठोस फैसला सबके सामने होगा।

देश में 42 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगी

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोना वैक्सीन की अब तक कुल 42,34,17,030 डोज लगाई जा चुकी हैं, जिनमें से बीते 24 घंटे में 54,76,423 लोगों को वैक्सीन डोज दिए गए हैं। भारत में शुक्रवार को कोरोना वायरस के 35,342 मामले दर्ज किए गए, जबकि इस दौरान 483 लोगों की मौत हो गई। देश में सक्रिय मामलों की संख्या इस वक्त 4,05,513 है और अब तक कुल 4,19,470 मौतें हो चुकी हैं। इससे पहले भी मोदी सरकार जनता के सामने पीएम केयर्स फंड का हिसाब हो या अपने कामो का सब देती आई है जिसके चलते ही मोदी सरकार के दामन पर अभी तक कोई भी दाग नही लग पाया है और इसी लिये सरकार की छवि खराब करने के लिये विपक्ष झूठे आंकड़े पेश करके लोगों में भ्रम फैलाने की साजिश रच रही है लेकिन वो सफल नहीं हो पा रही है।

मोदी सरकार को देखकर यही लगता है कि ये आजादी के बाद पहली सरकार होगी जो इतनी पारदर्शिता रखती है। वरना तो देश ने वो दौर भी देखे है जब हर एक दो दिन में घोटालो की खबर आती थी और वो खबर नहीं हकीकत होती थी।