देश के 9 वो राज्य जिन्होने केंद्र से भेजी गई वैक्सीन का पूरा नहीं किया इस्तेमाल 

कहते है ना कि अगर आप किसी पर एक उंगुली उठाते हो तो बाकी की चार खुद आप पर उठती है। मोदी सरकार वैक्सीन नही दे रही चिल्लाने वालो पर भी यही नियम लागू होता है क्योंकि वो तो कोरी अफवाह फैलाकर सरकार को बदनाम करने में जुट जाते हैं l लेकिन मोदी सरकार नये भारत की सरकार है जो आंकड़ो के जरिये उनके झूठ का दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है। राज्य सरकार की माने तो अभी भी राज्यों के पास करीब 1.65 करोड़ वैक्सीन की डोज उपलब्ध है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कम से कम नौ राज्यों ने जनवरी और मार्च के बीच उन्हें सप्लाई की गई कोरोना वैक्सीन की खुराक को पूरा इस्तेमाल किया ही नहीं। इसी के चलते महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान धीमा हो गया।

राज्यों को हर माह बढ़ाकर दिए गए टीके

सबसे पहले आपको ये बताना बहुत जरूरी है कि वैक्सीनेशन का काम भारत में कब से शुरू हुआ था। तो आपको बता दे कि भारत ने 16 जनवरी को कोरोना के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया था। 31 मार्च तक चले अभियान के पहले दो चरणों में विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को कवर किया गया। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक उम्र और फिर 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को वैक्सीन दी गई। इसी क्रम में  राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली ने उन्हें दी गई वैक्सीन का पूरा इस्तेमाल किया ही नहीं। जानकारो की माने तो ये राज्य, जनवरी, फरवरी और मार्च में केंद्र की ओर से टीकों की अच्छी खासी सप्लाई  के बावजूद, अपनी आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावी ढंग से टीका लगाने में विफल रहे। इन सभी राज्यों को सरकार ने हर महीने टीकों की संख्या बढ़ाकर ही दी है। लेकिन ये बस सियासत करते रहे और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिये टीकाकारण अभियान की रफ्तार मंद करते गये हालही में इनमें से कई राज्यो से टीके की बर्बादी की खबर भी खूब आई। राजस्थान पंजाब और छत्तीसगढ़ जहां वैक्सीन की खूब बर्बादी की गई।

सरकारी आंकड़ों से समझे किस राज्य को मिली कितनी वैक्सीन

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान को तीन माह में दी गई 1.06 करोड़ खुराक में से 0.57 करोड़ ही इस्तेमाल की गई, पंजाब को दी गई 0.29 करोड़ खुराक में से लगभग 840,000 ही  इस्तेमाल की गई। छत्तीसगढ़ को मिली 0.43 करोड़ खुराक में से 0.19 करोड़ ही  इस्तेमाल की गई। वहीं तेलंगाना में 0.41 करोड़ में से केवल 0.13 करोड़ वैक्सीन ही इस्तेमाल की गई। आंध्र प्रदेश को मिली 0.66 करोड़ वैक्सीन में से 0.26 करोड़ और झारखंड में 0.31 करोड़ में से लगभग 0.16 करोड़ की यूज की गई। इसके अलावा केरल को दी गई 0.63 करोड़ वैक्सीन में से 0.34 करोड़ ही इस्तेमाल हुई। इधर, महाराष्ट्र ने केंद्र द्वारा दी गई 1.43 करोड़ खुराक में से केवल 0.62 करोड़ खुराक का ही इस्तेमाल किया जबकि दिल्ली ने 0.44 करोड़ में से 0.24 करोड़ को ही इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं सरकार ये भी मान रही है कि कुछ राज्यो में वैक्सीन को लेकर जागरुकता की कमी और हिचकिचाहट के चलते भी टीकाकरण धीमा रहा। लेकिन बाद में वहां हालात बदलते हुए दिखाई दिये मसलन तमिलनाडू जहां पहले लोग टीका लगवाने कम आ रहे थे लेकिन अब वहां लोगो की संख्या बढ़ रही है। इसी तरह झारखंड में भी लोग अब टीकाकरण करवाने के लिये सामने आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह से इन राज्यों ने टीके की बर्बादी की उससे कहीं न कहीं देश के लाखों लोग आज वैक्सीन से महरूम हो रहे हैं।

मजे की बात तो ये है कि जिन 9 राज्यो में वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी हुई वो मोदी विरोधी पार्टियो की सरकार है। ऐसे में कई सवाल खड़े होते हैं। हालांकि जो सवाल खड़े हो रहे हैं उनसे जल्द ही केंद्र सरकार पर्दा उटायेगी लेकिन इससे पहले आप भी इन सवालों का जवाब खोजिये और खुद समझिये देशहित में कौन काम कर रहा है और कौन देशविरोध में..

 

 

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