एक फैसले से, विस्थापित कश्मीरियों का 73 साल का अंधेरा हुआ खत्म

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जम्मू कश्मीर में बहुत कुछ बदल रहा है, एक तरफ आंतक पर पूरी तरह से नकेल कसी गई है। जिससे घाटी में अमन की बाहर देखी जा रही है। तो दूसरी तरफ राज्य  के लाखों लोगों की तकदीर बदलने वाली है।  खास तौर पर उन लोगों के अच्छे दिन आ गए हैं, जिन्होंने आजादी के वक्त विस्थापन का दर्द सहा, लेकिन जम्मू कश्मीर में बसने के बाद भी उन्हें पिछले 73 वर्षों से कोई अधिकार नहीं दिए जा रहे थे।

डोमिसाइल सर्टिफिकेट नियम बदलने से बदलेगी घाटी 

जी हां एक नियम बदलने से घाटी में 73 वर्षों से रह रहे उन लोगों के चेहरे में चमक आ गई है जो यहां रहते हुए भी यहां के नहीं कहे जाते थे और न ही उन्हें कोई सरकारी सुविधा दी जाती थी। खासकर आजादी के वक्त विस्थापन के बाद जो लोग कश्मीर में रह रहे थे लेकिन अब जम्मू कश्मीर प्रशासन ने राज्य का स्थाई निवासी तय करने के नए नियम बनाए हैं जिसके बाद पश्चिमी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए शरणार्थी, वाल्मीकि समाज के लोग, गोरखा समुदाय के लोग और ऐसे सभी लोग जो वर्षों से जम्मू कश्मीर में रहते हुए भी अब तक वहां के स्थाई निवासी नहीं माने जाते थे, उन सभी लोगों को स्थाई निवासी का दर्जा मिल जायेगा। आंकड़ों पर नजर डाले तो कयास लगाया जा रहा है कि ऐसे लोगों की संख्या करीब 2 लाख है, जिनके पास डोमिसाइल सर्टिफिकेट ना होने से, उन्हें ना तो राज्य सरकार में नौकरी मिलती थी, ना ही उन्हें पंचायत में वोट करने का अधिकार मिलता था. लेकिन अब उन्हें ये सब अधिकार मिल सकेंगे। इसके अलावा ऐसे लोगों को भी राज्य की नागरिकता मिल सकेगी, जिनके परिवार 1947 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से आए थे, लेकिन उन्हें तब कश्मीर में बसने नहीं दिया था, ये लोग पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में आकर बस गए थे. ऐसे करीब एक लाख लोग हैं।

 नियम बदलने से आतंक  पर भी होगा करारा प्रहार 

सरकार के इस एक फैसले से राज्य में उन लोगो की मोनोपोली खत्म होगी जो सालों से कश्मीर में धारा 370 लगी होने के चलते फायदा उठा रहे थे तो दूसरी तरफ देश के हर कोने से लोग यहां आकर अब काम भी कर सकते हैं क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा रहेगा कि उनकी आने वाली पीढ़ी को यहां हर वो सुविधा मिल सकेगी जो दूसरे राज्यों में मिलती है, इतना ही नही सबसे बड़ी बात तो राज्य से बाहर शादी करने वाली लड़कियों लिये हुई है क्योंकि अब उनका कश्मीरी होने का दर्जा नही छिनेगा और वो कश्मीर में जाकर बस भी सकती हैं। ऐसा होने पर वहां आंतक को बढ़ा देने वाले भी कमजोर पड़ेंगे क्योंकि अभी वो धर्म के नाम पर वहां लोगों को एकजुट करके नफरत फैलाते हैं लेकिन आने वाले दिनो में उनकी ये सोच बदल जायेगी क्योंकि घाटी में भी हर राज्य की तरह सब धर्म वर्ग के लोग रहेंगे। मतलब घाटी में आतंक की बंदूक खामोश  होगी और हर तरफ अमन ही अमन होगा।

अनुच्छेद 370 को हटाने वाले फैसले ने अलगाववादी सोंच को सबसे गहरी चोट दी थी, इसके बाद अब स्थाई निवासी के नियमों में बदलाव से इन लोगों को दूसरी बड़ी चोट मिली है, ऐसी चोट जिसको लेकर पाकिस्तान भी करा रहा है। क्योंकि वो अच्छी तरह से जानता है कि इस नियम के लागू होने के बाद वो कश्मीर में अपने दहशत गर्द के जरिये आतंक का खेल नही खेल पायेगा। तो वहीं कश्मीर की वादियों  में नया सुर सुनाई देगा। जहां एक भारत श्रेष्ठ भारत की झलक भी देखी जायेगी, और ये कहा जाये तो गलत न होगा कि आने वाले समय में कश्मीर पूरी तरह से बदला हुआ दिखाई देगा।


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