कमोडिटी ट्रांसपोर्टेशन बढ़ाने में मददगार होगी 6.7 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग

India’s longest electrified rail tunnel

भारतीय रेलवे ने देश में सबसे लंबी विद्युतीकृत सुरंग का निर्माण किया है, जो देश में भारतीय रेलवे का न सिर्फ एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, बल्कि रेलवे नेटवर्क पर माल ढुलाई के लिए एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। जिससे रेलवे को प्रति रेक 7.5 लाख रुपये तक की बचत होने की उम्मीद है। यह सुरंग 112 किलोमीटर ओबुलवरिपल्ली-वेंकटचलम-कृष्णापटनम पोर्ट लाइन का हिस्सा है, जिसे 1,993 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।

इस साल 25 जून को चालू की गई यह सिंगल लाइन ने कोयले, उर्वरक, लौह अयस्क और चूना पत्थर जैसी वस्तुओं के लिए भाड़ा में कमी की है। 6.6 किमी लंबी सुरंग, चेरलोपल्ली और रैपुरु रेलवे स्टेशनों के बीच 437 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह एक घोड़े की नाल के आकार में 44 ट्रॉली रिफ्यूज और 14 क्रॉस-मार्ग है। सुरंग को रिकॉर्ड 43 महीने में पूरा किया गया था।

ऐसे समय में जब देश आर्थिक मंदी दस्तक दे रहा है, नए मार्ग से देश भर में माल के आवागमन में आसानी होने की उम्मीद है। कोयले के लिए, प्रति रेक माल में अंतर 3 लाख रुपये से 7.5 लाख रुपये तक होता है। उर्वरक के लिए, भाड़ा प्रति रेक में अंतर 1.5 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक होता है। लौह अयस्क के लिए, माल प्रति रेक में अंतर लगभग 6 लाख रुपये है। चूना पत्थर के लिए, अंतर लगभग 5.25 लाख रुपये है।

electrified rail tunnel

दक्षिण मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सीएच राकेश के अनुसार, कृष्णापटनम बंदरगाह से मालगाड़ियों पर चार उत्पादों – कोयला, लौह अयस्क, लिमस्टोन और उर्वरक लोड किए जाते हैं और इन्हें देश के पश्चिमी भागों में भेज दिया जाता है। ओबलावरिपल्ली और कृष्णापट्टनम के बीच नवनिर्मित लाइन के माध्यम से ये मालगाड़ियां चलती हैं, जिसमें चेरलोपल्ली और रापुर स्टेशनों के बीच सबसे लंबी विद्युतीकृत सुरंग है।

अधिकारी ने बताया कि इन सभी वस्तुओं के भाड़ा संचालन के लागत में बचत ओबुलवारीपल्ली और कृष्णापटनम बंदरगाह के बीच नई बीजी लाइन की वज़ह से है जो अब मालगाड़ियों को सीधे वेंकटचलम से सीधे आने में सक्षम बनाती है। पहले, जब इस लाइन का निर्माण नहीं हुआ था, तो मालगाड़ियों को देश के पश्चिमी भागों की यात्रा के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। लेकिन अब, लाइन में सुरंग के साथ, वेंकटचलम और ओबुलावरिपल्ली के बीच दूरी 72 किमी कम हो गई है। इससे यात्रा के समय 10 घंटे से घटकर मात्र पांच घंटे रह गया है और वस्तुओं पर माल ढुलाई की लागत में भी कमी आई है। कृष्णापटनम बंदरगाह की वेबसाइट से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, आयात-निर्यात के लिए बंदरगाह पर रेल मार्ग से माल की आवाजाही वित्त वर्ष 2018-19 में 57.55 प्रतिशत बढ़कर 198.2 लाख टन पर पहुँच गयी है ।

नई लाइन, जो केवल माल ढुलाई के लिए है, चेन्नई-हावड़ा और चेन्नई-मुंबई रेल मार्गों के लिए सबसे छोटा रास्ता भी प्रदान करती है ।