मटर की खेती से 100 गांवों के 5000 लोग बने आत्मनिर्भर

कहते है न जहां चाह वहां राह खुद- ब-खुद निकल आते है। कुछ इसी बात को सच साबित करके दिखाया है पंजाब राज्य के होशियारपुर शहर के एक गांव चब्बेवाल ने। दो दशक पहले तक आर्थिक तंगी से जूझने वाले यहां के हजारों किसान परिवारों के जीवन में मटर ने कैसे समृद्धि ला दी है जो ये बताता है कि मेहनत से सबकुछ पाया जा सकता है।

मटर की खेती से बदली 100 गांव की तकदीर

दो दशक पहले जिसे पिछड़े क्षेत्र के रूप में गिना जाता था, आज वही चब्बेवाल देश-दुनिया के लघु किसानों को सफलता का मंत्र दे रहा है। मीठे स्वाद के कारण देश के तमाम राज्यों में चब्बेवाल के मटर की मांग है। फसल भी सबसे पहले तैयार हो जाती है। इसी कारण एशिया की एकमात्र मटर मंडी भी यहां बनी है। इलाके की 2500 एकड़ भूमि पर किसान मटर उगाते हैं और महज चार महीने में प्रति एकड़ लाख रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं। आज चब्बेवाल का मटर पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात की मंडियों की शान बना हुआ है। चब्बेवाल के गांव कालेवाल, भाम, बिहाला, नंगल कलां, सकरूली, पट्टी, राजपुर, लहलीकलां, जंडोली, रामपुर, मुगोवाल और सरहाला सहित करीब 100 गांवों में मटर की खेती होती है। सितंबर में बुआई शुरू होती है और 15 नवंबर तक शुरुआती फसल आ जाती है। इसका दाम 60 रुपये किलो तक आसानी से मिल जाता है। पूरे ब्लाक में मीलों तक सिर्फ मटर की फसल ही नजर आती है।

हजारो लोगों को घर पर ही मिला रोजगार

मटर की खेती से इस इलाके में फायदा ये हुआ कि यहां रहने वाले जो पहले दूसरे राज्य में जाकर करोजगार करते थे वो आज अपने घर पर रहकर रोजगार कर रहे है।  मटर उत्पादक 1500 से अधिक लघु किसानों के अलावा मटर की तुड़ाई, मंडी और ट्रांसपोर्ट के काम से जुड़कर इलाके के 5000 से अधिक परिवारों  इस से आत्मनिर्भर हो पाये है। इतना ही नही आज समूचे पंजाब और हिमाचल में इस गांव में रहने वालों को मटर उत्पादक के नाम से पुकारा जाता है। कुछ यही बात तो हमारे पीएम मोदी जी भी कहते है कि जिस जगह पर जिस वस्तु की अधिक क्षमता में पैदावार हो उसे ही करना चाहिये जिससे वो उस उत्पादन के मामले में सबसे ज्यादा आत्मनिर्भर हो सके।

बदलाव की बयार में भारत अब आगे ही निकलता जा रहा है। सरकार की कुशल नीति और लोगो को थोड़ा प्रोत्साहन का ही असर है कि आज कई ऐसे जिले या कस्बे या लोग सामने आ रहे है जो अपने राज्य या इलाके को आत्मनिर्भर बनाने में लगे है जिससे भारत देश आगे भी बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।