44 सांसदों ने भारत को जीएसपी में फिर से शामिल करने की ट्रम्प प्रशासन से की अपील

44 MPs appeal to Trump administration to reintroduce India to GSP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक से पहले अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों के 44 प्रभावशाली सांसदों ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से अपील किया है कि अमेरिका और भारत के बीच होने वाले संभावित व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में अहम जनरलाइज़्ड सिस्टम प्रेफरेंस या GSP देश का दर्जा फिर से बहाल किया जाए । इन सभी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन को लेटर लिखकर दर्जा दोबारा बहाल करने की अपील की है। अमेरिका ने जनरलाइज़्ड सिस्टम प्रेफरेंस (GSP) को 5 जून को खत्म कर दिया था।

बता दे की 1974 से लागू की गई जीएसपी सबसे बड़ी और सबसे पुरानी अमेरिकी व्यापार वरीयता योजना है और यह लाभार्थी देशों के हजारों उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देती है। किसी देश के जीएसपी व्यवस्था में शामिल होने के बाद अमेरिका उससे एक तय राशि के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगाता है। सांसद जिम हाइम्स (Jim Himes) और रॉन एस्टेस (Ron Estes) की तरफ से अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर (US Trade Representative Robert Lighthizer) को लिखे पत्र में कुल 26 डेमोक्रेट्स और 18 रिपब्लिकन सासंदों ने दस्तखत किए हैं।

GSP के कार्यकारी निदेशक डैन एंथनी ने कहा कि भारत से जीएसपी दर्जा छीने जाने के बाद भी भारतीय निर्यातकों के हालात अच्छे हैं जबकि अमेरिकी कंपनियों को नए टैरिफ के तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें अपने उद्योगों के लिए बाजारों की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी। कुछ छोटे मसलों के कारण इस पर असर नहीं पड़ना चाहिए। बता दें कि साल 2017 में भारत जीएसपी कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश था। उसको अमेरिका में 5.7 अरब डॉलर के आयात पर शुल्क में छूट मिली थी।

गौरतलब है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा से कुछ दिन पहले 44 अमेरिकी सांसदों द्वारा अपनी सरकार पर दबाव बढ़ाया जा रहा है, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ वार्ता करने वाले है । सांसदों ने कहा है कि भारत को जीएसपी से हटाने की कार्रवाई का असर अमेरिकी कंपनियों पर पड़ा है जो भारतीय बाजार तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

सांसदों ने पत्र में लिखा है, “सरकार का बदलाव बची चिंताओं को दूर करने का एक नया अवसर प्रदान करता है और हमें उम्मीद है कि नए भारतीय अधिकारी अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों के लिए बाजार में सुधार के लिए ठोस समाधान पेश करेंगे।”