चाय बेचकर 40 गरीब परिवार के बच्चों को दे रहे हैं मुफ्त शिक्षा

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Malik giving free education by selling tea

अपने सपनों को तो हर कोई पूरा करना चाहता है, लेकिन वो लोग बेहद खास होते हैं जो दूसरों के सपनों के लिए खुद को समर्पित कर देंते है। ऐसी कई मिसालें हमारे सामने हैं, जिसमें कई लोगों ने चैरिटी के लिए अपनी धन-दौलत, जायदाद और भी जाने क्या क्या दांव पर लगा दिया। लेकिन ये बात तब और खास हो जाती है जब कोई गरीब अपनी मेहनत की कमाई से दूसरों के सपनों को आसमान देने की कोशिश करे।

कानपुर में रहने वाले मोहम्मद महबूब मलिक ऐसे ही शख्स हैं। 29 वर्षीय महबूब पढ़ाई कर अपनी जिंदगी में कुछ बनना चाहते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण दसवीं से आगे पढ़ नहीं पाए। इसके बाद उन्होने शहर में एक चाय का ठेला लगाकर आजीविका कमाना शुरू किया। लेकिन पढ़ न पाने की टीस उन्हें हमेशा रहती थी और तभी उनके मन में खयाल आया कि ऐसे गरीब बच्चे जो पैसे की कमी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, उनकी मदद की जानी चाहिए। इसी खयाल के साथ एक चाय की दुकान चलाने वाले मोहम्मद मलिक को गरीब बच्चों को पढ़ाने की ऐसी धुन सवार हुई कि उसने अपनी सारी कमाई इसमें लगा दी। चाय की दुकान चलाने वाले मलिक की कमाई का एकमात्र जरिया ये दुकान ही है। वह महीने भर में जो भी कमाते हैं सब गरीब बच्चों की कापी ,किताब और ड्रेस और पढ़ाई में खर्च कर देते हैं।

free education

मलिक ने कानपुर के शारदानगर में एक स्कूल खोला है। जहां गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। मोहम्मद मलिक ने बताया, ‘‘2017 में अपनी जमा पूंजी के जरिए बेसहारा बच्चों के लिए कोचिंग सेंटर खोला था। यह सेंटर शारदा नगर, गुरुदेव टॉकीज के पास मलिक बस्ती और चकेरी के कांशीराम कॉलोनी में खोला गया था, जिसमें बच्चों को मुफ्त पढ़ाया जाता था।’’ जब इस काम की जानकारी मलिक के दोस्त नीलेश कुमार को हुई तो उसने उनका हौसला बढ़ाया। नीलेश ने एनजीओ बनाकर सेंटर संचालित करने की राय दी। ‘मां तुझे सलाम फाउंडेशन’ नाम से एनजीओ बनाया और इसी के जरिए सेंटर से 40 बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है।

फ्री की चाय

मलिक की चाय की दुकान कोचिंग और मंडी के बीच में है। आईआईटी, सीपीएमटी, इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्र आसपास रहते हैं। जब प्रतियोगी परीक्षा होती है तो छात्रों को निशुल्क चाय होती है। मलिक कहते हैं कि मैंने अपनी दुकान पर एक स्लोगन भी लगा रखा है- ‘‘मां जब भी तुम्हारी याद आती है, जब तुम नहीं होती हो तो मलिक भाई की चाय काम आती है।’’ वे आगे ये भी बताते हैं कि शुरुआत में लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन उनकी बातों की परवाह कभी नहीं की। जो मुझे अच्छा लगता है, वह काम करने से पीछे नहीं हटता।

प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित

मलिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बहुत प्रभावित हैं। वह कहते हैं कि चाय वाला सभी के दिमाग को पढ़ लेता है। जब कोई ग्राहक आता है तो हम लोग उसे देखकर समझ जाते है कि वो कब खुश है और कब दुखी है।

खुद गरीबी की वजह से बहुत ज्यादा पढ़ाई न कर पाने वाले महबूब समाज के लिए एक मिसाल बन गए हैं। उन्होंने समाज के गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है।

Image Courtesy: Bhaskar


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