Indian Railways की कार्रवाईः 32 अधिकारियों को किया जबरन रिटायर

PM Modi

भ्रष्टाचार और नॉन परफॉर्मेंस पर मोदी सरकार का एक्शन जारी है। सरकार के पास जबरन रिटायरमेंट देने का विकल्प दशकों से है लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल बहुत कम ही किया गया है। वर्तमान सरकार इन नियमों को सख्ती से लागू करने में जुटी है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने रेल मंत्रालय को निर्देश दिया था कि नॉन परफॉर्मेंस और भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी फिक्स की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पीएम ने इंफ्रास्ट्रक्चर सचिवों की मीटिंग में भी ऐसे अफसरों को चिन्हित करने को कहा था।

इंडियन रेलवे ने इसी कारवाई के अंतर्गत जनहित में 50 साल से अधिक उम्र के अपने 32 अधिकारियों को अक्षमता, संदिग्ध निष्ठा और अवांछित आचरण के चलते समय से पहले जबरन रिटायरमेंट दे दिया है। उसने समय समय पर की जाने वाली समीक्षा के तहत यह कदम उठाया है। करप्शन और नॉन परफॉर्मेंस पर एक्शन के तहत इन अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने से पहले इन्हें नोटिस दिया गया था। जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है वे अलग-अलग जोन से हैं।

क्या है नियम?

सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) 1972 के नियम में कहा गया है कि 30 साल की सेवा पूरी कर चुके या 50 की उम्र पार कर चुके अधिकारियों की सेवा सरकार समीक्षा के आधार पर समाप्त कर सकती है। इसके लिए सरकार को नोटिस देना होगा और तीन महीने का वेतन भत्ता भी देना होगा। अक्षमता या अनियमितता के आरोपों के बाद यह समीक्षा की जाती है।

इससे पहले रेलवे ने सभी बोर्ड को कहा था कि उन अधिकारियों की सूची बनाई जाए जो परफॉर्मेंस के पैमाने पर सही नहीं उतर रहे थे। इसके अलावा उन अधिकारियों के बारे में भी पूछा गया था जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

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रेलवे ने एक बयान में यह जानकारी देते हुए बताया है कि यह असामान्य कदम पब्लिक इंटरेस्ट को देखते हुए उठाया गया है। रेलवे के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है। पहली बार रेलवे ने 2016-17 में ऐसा ही कदम उठाया था और चार अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत कर दिया था। रेलवे ने कहा,‘‘ रेलवे बोर्ड में समूह ए के अधिकारियों की आखिरी समीक्षा 2016-17 में की गयी थी और 1824 अधिकारियों की सेवाओं की समीक्षा की गयी थी। उनमें से चार अधिकारियों को समय से पहले जबरन रिटायर कर दिये गये थे।’’ रेलवे ने कहा कि इस कदम का लक्ष्य सभी स्तरों पर कार्यकुशलता में सुधार लाना और प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत बनाना है।

गौरतलब है कि पिछले पांच सालों में मोदी सरकार द्वारा 96 वरिष्ठ अधिकारियों समेत 220 भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत कर दिया गया।