स्टार्टअप्स चैलेंज / सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बताने पर मिलेंगे 3 लाख रुपए

single use plastic option

एक बार इस्तेमाल कर फेंके जाने वाले यानी सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगाम कसने की सरकार के स्तर पर तैयारी जोर-शोर से चल रही है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही केंद्र सरकार, उसका विकल्प भी तलाश रही है। सरकार ने अब इसका विकल्प ढूंढ़ने का नया तरीका निकाला है।

सरकार ने स्टार्टअप के लिए सिंगल यूज उपयोग वाले प्लास्टिक का विकल्प पेश करने के लिए एक प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें पहले विजेता को प्रत्येक समस्या के समाधान पर तीन लाख रुपये मिलेंगे। दूसरे विजेता को दो लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने कहा, ‘‘एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक को लेकर बड़ी चुनौती का लक्ष्य रखे जाने का मकसद इनोवेटर्स और स्टार्टअप को इसके समाधान के लिये डिजाइन विकसित करने को प्रोत्साहित करना और इसका विकल्प तैयार करना है।’

डीपीआईआईटी ने कहा कि इस चुनौती में सभी स्टार्टअप भाग ले सकते हैं। विशेषज्ञों की अंतरिम ज्यूरी सभी आवेदनों की समीक्षा के बाद डीपीआईआईटी द्वारा निर्धारित आकलन के मानदंड के आधार पर सर्वश्रेष्ठ एंट्रीज को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इस प्रतियोगिता के नतीजों की घोषणा 31 अक्टूबर को की जाएगी।

केंद्र सरकार लंबे समय से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने की दिशा में काम कर रही है। इसको लेकर सरकार इसका विकल्प तलाश रही है। प्लास्टिक इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प ऐसा होना चाहिए जो आसानी से उपलब्ध और महंगा भी ना हो। सरकार भी आम लोगों को बोझ से बचाने के लिए इसी दिशा में काम कर रही है। इसीलिए सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक चैलेंज जारी किया है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को बताया कि भारत देश को प्लास्टिक मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए एक बहुत बड़े अभियान की शुरुआत कर रहा है।

गौरतलब है की हर साल 300 मिलियन टन प्लास्टिक प्रोड्यूस होता है। इसमें से 150 मिलियन टन प्लास्टिक सिंगल-यूज होता है। यानी ये प्लास्टिक हम एक बार इस्तेमाल कर फेंक देते हैं। वहीं दुनियाभर में सिर्फ 10 से 13 फीसदी प्लास्टिक री-साइकिल हो पाता है।

सिंगल यूज प्ला‍स्टिक प्रोडक्ट की बात करें तो इसमें – प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक की बोतलें, स्ट्रॉ, कप, प्लेट्स, फूड पैकजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, गिफ्ट रैपर्स और कॉफी के डिस्पोजेबल कप्स आदि शामिल हैं।