16वीं लोकसभा : लिख दिया कई नए इतिहास

कुछ खट्टे कुछ मीठे कुछ नोकछोक भरे पल के साथ 16 वीं लोकसभा की बिदाई हो गई है लेकिन 16वीं लोकसभा के कार्यकाल मे कुछ ऐसे इतिहास भी बने है जिसे आने वाला वक्त हमेशा याद रखेगा चलिये हम उसी पर कुछ नजर डालते है

16 वीं लोकसभा का गठन मोदी सरकार के साथ हुआ देश मे मोदी सरकार करीब 30 साल के बाद ऐसी सरकार  बनी जिसके पास पूरा बहुमत था। इतना ही नही पहली बार आजादी के बाद कांग्रेस ऐसी पार्टी बनकर उभरी जिसे 50 से भी कम सीट जीती। वही कई पार्टी ऐसी थी जिनके एक सदस्य भी लोकसभा की दहलीज नही लांघ पाये। हां, लेकिन ये जरूर है कि इस सत्र मे सत्ता पक्ष या विपक्ष मे कितनी भी नोकछोक हुई हो पर काम के मामले मे भी इस सत्र ने खूब काम किया है। समूचे कार्यकाल को देखा जाये तो सभी सत्रो मे करीब 85 फीसदी काम हुआ है। जबकि 8 सत्र ऐसी है जिनमे 100 फीसदी काम किया गया है. जिसके चलते करीब 213 बिल पेश किये गये  जिसमे 203 बिल को संसद से पास किया गया।

कालेधन और कर प्रणाली के लिये लाये आनेक बिल –‘एक राष्ट्र एक कर’ के सपने को आजादी के बाद से ही देखा जा रहा था लेकिन इसे साकाररूप दिया मोदी सरकार ने 4 अगस्त 2016 को लोकसभा से पास किया गया। जो अपने आप मे एक बढ़ी कामयाबी थी। इस बिल को उसी तरह से लागू किया गया जैसे आजादी के बाद देश आजाद हुआ था। इसी तरह बेनामी संपत्ती पर कड़े कानून का बिल भी मोदी सरकार के वक्त ही पास हुआ और उस पर मोहर लगी। शत्रु संपत्ति बिल जो सालों से संसद फंसा हुआ था वो भी मोदी सरकार के वक्त पेश हुआ। काले धन पर लगाम लगाने के लिये कानून हो या फिर आर्थिक भगोड़ो पर कानून बनाने की बात हो सब मोदी सरकार की कोशिश के चलते ही पूरे हुए और ये साफ इस लिये हो पाया क्योकि मोदी सरकार की नीयत साफ थी। जिसके चलते देश आज आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है।

ट्रांसजेंडर्स को लोकसभा से पारित हुआ बिल

भारत के संविधान में सभी व्यक्तियों को समता की गारंटी एवं सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित किये जाने के बाद भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार होना जारी है और इसी अत्याचार को रोकने के लिए लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़ा एक अहम बिल पारित कर दिया गया. यह बिल ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों को संरक्षित करता है जिसपर सदन ने ध्वनिमत से मुहर लगा दी. इस बिल में ट्रांसजेंडर व्यक्ति को परिभाषित करने, उनके खिलाफ भेदभाव पर पाबंदी लगाने और उन्हें लिंग पहचान का अधिकार देने के प्रावधान शामिल हैं.लोकसभा में अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच सदन ने 27 सरकारी संशोधनों को स्वीकार करने और कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी.।

OBC बिल को भी हरी झंडी 16वीं लोकसभा मे दिखाई गई-

एक हफ्ते पहले ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने दो तिहाई से अधिक बहुमत के साथ सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। ये बिल भी सालों से कटका हुआ था लेकिन साफगोशी के चलते ही मोदी सरकार ने इस बिल को लोकसभा मे रखने की हिम्मत की और उसे पास भी किया।

10 फीसदी समान्यवर्ग को दिया आरक्षण – काफी लंबे वक्त से समान्य वर्ग  आरक्षण की आवाज उठा रही थी लेकिन सभी इस मुद्दे पर सियासत तो करते थे लेकिन अमलीजामा अगर किसी ने पहनाया तो वो है नमो सरकार नमो सरकार ने  ही सविधान मे बदलाव करके समान्य वर्ग को आर्क्षण देने का बिल पेश किया और उसे पास भी करवाया। यहा गौरकरने वाली बात ये थी कि इस आरक्षण को बिना किसी का आरक्षण छेड़े दिया गया है। यानी की बिना किसे के हक को मारे हुए आरक्षण दिया गया है।

तीन तलाक या NRC बिल का पास न होना जरूर थोड़ा दुख देता है।  लेकिन अगर मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल को देखा जाये तो सचमुच इस सत्र ने इतिहास बनाया है जिससे भारत का भाग्य नये रूप मे बनने वाला है. कहा जाए तो पिछले कई लोकसभा सत्रों से बेहतर रहा 16 लोकसभा.