के परासरन की अध्यक्षता में 15 सदस्यी राम मंदिर ट्रस्ट गठित, जानिए- कौन कौन है इसमें शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट बनाने का एलान किया। जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि इस ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे। ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के नाम से गठित इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट में एक ट्रस्टी अनिवार्य रूप से दलित होगा।

अयोध्या विवाद में रामलला को सुप्रीम कोर्ट में जीत दिलाने वाले रामभक्त और हिंदू पक्ष के मुख्य वकील 92 वर्षीय के परासरन को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है। परासरन के अलावा इस ट्रस्ट में एक शंकराचार्य समेत पांच सदस्य धर्मगुरु ट्रस्ट में शामिल हैं। साथ ही अयोध्या के पूर्व शाही परिवार के राजा विमलेंद्र प्रताप मिश्रा, अयोध्या के ही होम्योपैथी डॉक्टर अनिल मिश्रा और कलेक्टर को ट्रस्टी बनाया गया है। इसके साथ ही 1989 में राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित कामेश्वर चौपाल का भी नाम इसमें शामिल है।

ट्रस्ट के सभी सदस्यों का हिंदू धर्मावलंबी होना अनिवार्य बनाया गया है। यहां तक कि यह शर्त उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत दो सदस्यों और अयोध्या के जिलाधिकारी के पदेन सदस्य होने पर भी लागू होगा।

नौ फरवरी से पहले ट्रस्ट गठित करने का था आदेश

इस ट्रस्ट का गठन नौ नंवबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप और 1993 में संसद से पारित ‘अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून’ के प्रावधान के तहत किया गया है। सदियों पुराने विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थल पर रामलला के पक्ष में फैसला दिया था और सरकार को तीन महीने के अंदर इसके लिए ट्रस्ट के गठन का निर्देश दिया था। मोदी सरकार ने तीन महीने पूरे होने के चार दिन पहले ही ट्रस्ट का गठन कर दिया।

आइयें हम आपको बताते है ट्रस्ट के स्थायी नौ सदस्यों के बारे में :

के परासरन

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. परासरन ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे, जिन्होंने रामलला विराजमान की ओर से अयोध्या मामले में लंबे समय तक केस की पैरवी की थी। 92 वर्षीय परासन ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर बहस की जबकि चीफ जस्टिस रंजन गोगई (Chief Justice Ranjan Gogoi) ने उनसे पूछा था, ” क्या आप बैठ कर बहस करना चाहेंगे? इस पर उन्होंने कहा कोई बात नहीं खड़े हो कर बहस करने की परंपरा रही है।” उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के वकील रहे परासरन को भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है। राम मंदिर मामले के दौरान उन्होंने स्कंध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर का अस्तित्व साबित करने की कोशिश की।

स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज

जगद्गुारु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं।

डॉ. अनिल कुमार मिश्र

पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर अनिल कुमार मिश्र फैजाबाद की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं। आंबेडकर नगर जिले के पहतीपुर के पतौना गांव के मूल निवासी अनिल राम मंदिर आंदोलन के दौरान विनय कटियार के साथ जुड़े थे। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े। मौजूदा वक्त में वह संघ के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह हैं। वह उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार पद पर भी कार्यरत हैं।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज

महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्मे स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज रामायण, श्रीमद् भागवत गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का देश विदेश में प्रवचन करते हैं। वह राज्य के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हैं।

युगपुरुष परमानंद जी महाराज

अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद जी महाराज भी ट्रस्ट में शामिल किए गए हैं। उनकी वेदांत पर 150 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया था।

जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज

कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं। दिसंबर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के निधन के बाद उन्होंने यह पदवी संभाली।

महंत दिनेंद्र दास

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़ा की अयोध्या बैठक के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास को भी ट्रस्ट में जगह मिली है। सूत्रों के मुताबिक, दास बैठक में हिस्सा तो लेंगे लेकिन उन्हें मतदान का हक नहीं होगा।

कामेश्वर चौपाल

दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कामेश्वर चौपाल को भी जगह दी गई है। 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी। संघ ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया है। वह 1991 में रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं।

विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र

अयोध्या राज परिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है। रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और समाजसेवी मिश्र ने 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था।