महिलाओं को CAA के खिलाफ धरने के लिए उकसाने पर 13 लोगों को 50-50 लाख का नोटिस

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नागरिकता कानून संशोधन (CAA) के खिलाफ महिलाओं को धरने के लिए उकसाने पर यूपी के संभल जिले के एसडीएम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को नोटिस भेजा है। नोटिस में इन प्रत्येक लोगों पर 50-50 लाख रुपये का निजी मुचलका (बॉन्ड) भरने का भी आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्हें दो गारंटर भी पेश करने के लिए कहा गया है। सात दिन के अंदर उन्हें नोटिस का जवाब दाखिल करने को कहा गया है। एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि इसके बाद हम उनके स्पष्टीकरण की जांच करेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक संभल प्रशासन ने इन सभी 13 आरोपियों पर सीएए के खिलाफ महिलाओं को धरने पर बैठने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। यह विरोध प्रदर्शन संभल जिले के नखास इलाके में आयोजित हुआ। सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शन के मामले में उकसाने के आरोप में जिला प्रशासन ने 13 लोगों को चिह्नित कर उन्हें 50-50 लाख रुपए के मुचलके के नोटिस जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभल के एसडीएम राजेश कुमार ने कि हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि आरोपी महिलाओं को शहर में धरने के लिए भड़का रहे थे। हालांकि यह पहला मामला नहीं है जब यूपी प्रशासन ने ऐसा कुछ कि हो।

उन्होंने बताया कि इस मुचलके के तहत उन चिह्नित लोगों को यह लिखकर देना होगा कि वे भविष्य में ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे, और अगर वे भविष्य में ऐसी हरकत करते हैं तो उनसे 50-50 लाख रुपए की वसूली की जाए।

ज्ञातव्य है कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ सम्भल के नखासा थाना क्षेत्र के पक्का बाग खेड़ा पर मुस्लिम महिलाएं गत 24 जनवरी से धरना दे रही हैं।

गरीब परिवारों से आते हैं आरोपी

एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि वे निजी मुचलके के तौर पर जमा करें। उन्होंने कहा कि यह बॉन्ड जमानत या गारंटी की तरह काम करेगा कि वे लोग आगे इस तरह की गतिविधियों में लिप्त नहीं होंगे। बताया गया कि आरोपियों में ज्यादातर लोग बहुत गरीब परिवार से आते हैं।

आरोपियों के वकील मोहम्मद याकूब गामा ने बताया कि जिन लोगों को 50 लाख का मुआवजा जमा करने को कहा गया है उनमें से कई ऐसे हैं जिनकी कुल संपत्ति ही 2 लाख रुपये है। गामा ने कहा कि संभल छोड़िए, देश में इससे पहले कहीं भी सीआरपीसी की धारा 107/116 के तहत इतनी बड़ी राशि का मुचलका भरने का नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों के लिए सरकारी आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करना आसान भी नहीं होता।

 


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