मोदी से प्रेरणा ले 12वीं के छात्र ने बनाई सस्ती इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार

12th student took inspiration from Modi, made inexpensive electric sports car | PC - Google

दिल्ली में रहने वाले 19 साल के 12वीं पास कौशल ने इलेक्ट्रिक से चलने वाली सस्ती स्पोर्ट्स कार बनाई है| नरेन्द्र मोदी को अपनी प्रेरणा मानने वाले कौशल का दावा है कि उनकी कार दुनिया की सबसे सस्ती स्पोर्ट्स कार है| यहाँ पर ये बताना जरुरी है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक कारों के उपयोग को बढ़ावा दिया है| एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के विचार से ही प्रेरणा लेकर कौशल ये कार बनाने की सोची|

सबसे सस्ती स्पोर्ट्स कार – कौशल

इस अनोखे कार को बनाने वाले कौशल ने दावा किया है कि उनकी कार दुनिया की सबसे सस्ती स्पोर्ट्स कार है| जिस तरह की कार उन्होंने बनाई है, अमूमन ऐसी कारों की कीमत बाज़ार में करीब एक करोड़ के आस-पास होती है, जबकि उन्हें कार बनाने में कुल लागत करीब 12 लाख रूपये आई है|

कार की ख़ास बातें

• पुर्णतः स्वदेशी कार
• 120-170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार
• 0-40 किलोमीटर की रफ़्तार महज 5 सेकंड में
• कनवर्टिबल रूफ से लैश कार
• कार में पीछे की तरफ इलेक्ट्रिक इंजन, गति बढ़ाने में सहायक
• पेट्रोल और डीजल इंजन से भी चलने में सक्षम

पैसे की कमी भी रोक नहीं पाई कौशल का हौसला

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के किसान संतोष कुमार के पुत्र कौशल की पढाई के रास्ते में उनके परिवार की गरीबी आ गयी| पैसों की कमी के चलते कौशल अपनी आगे की पढाई करने में असमर्थ थे, लेकिन उनकी विलक्षण प्रतिभा को देख कर नॉएडा के अमिटी विश्वविद्यालय ने उन्हें ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में बी-टेक करने का मौका दिया है| इस से पहले कौशल ने सरस्वती विहार, दिल्ली के सर्वोदय विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है|

कौशल को मिल चुके हैं कई पुरस्कार

बचपन से ही ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में रूचि रखने वाले कौशल ने इन्टरनेट और दोस्तों से मांगी गयी किताबों के जरिये ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में अपने ज्ञान को बढाया| दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने एक मिनी बुलडोजर बनाया था जिसके लिए दिल्ली विज्ञान प्रदर्शनी में पुरस्कार भी मिला था| इसके अलावा भी उन्हें कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं|

स्पोर्ट्स कार बनाने के लिए पैसों की जरुरत होने के कारण, अपनी कार का आईडिया लेकर कौशल कई कंपनियों से भी मिले थे| आख़िरकार बहादुरगढ़ की एक कंपनी ने उन्हें सहयोग दिया|